तुफानोसे भिड़ने की
करली मनमें तैयारी है
छूट गए है अपने पीछे
मगर ये सफर जारी है
आज धधग उठी है अग्नि
कल की जो चिंगारी है
जिसने मनमे ठान लिया हो
वो संकटपे भी भारी है
दुविधाके मदमस्त गज पर
दृढ़ संकल्प की सवारी है
सुखी हुआ वो जीवन पथपर
जिसकी दुःखसे यारी है
टूटके भी लड़ जाने की
दिल मे ये जो खुमारी है
प्रकाश देना अंधकार में
ये दिप की जिम्मेदारी है
भारत (हिमांशु)