Wednesday, June 22, 2022

सफर

 तुफानोसे भिड़ने की 

करली मनमें तैयारी है

छूट गए है अपने पीछे 

मगर ये सफर जारी है 


आज धधग उठी है अग्नि

कल की जो चिंगारी है 

जिसने मनमे ठान लिया हो 

वो संकटपे भी भारी है 


दुविधाके मदमस्त गज पर 

दृढ़ संकल्प की सवारी है

सुखी हुआ वो जीवन पथपर

जिसकी दुःखसे यारी है 


टूटके भी लड़ जाने की

दिल मे ये जो खुमारी है

प्रकाश देना अंधकार में 

ये दिप की जिम्मेदारी है 


भारत (हिमांशु)

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